perplexityofmind
These are feelings ideas and other things put into words or atleast tried.
Tuesday, October 25, 2011
Intezar
इंतज़ार
सजा इ इश्क का दर्द कुछ ऐसा हैं की!
इल्तिजा करते रहते है उनके हाँ की !!
नवीन
Saturday, October 15, 2011
वो दिन भी क्या थे
वो दिन भी क्या थे
जब अल्फाजो की जुबां इशारे बोलते थे
आज पन्ने रंग जाते हैं सियहि(इंक) से,
कुछ नम आज ऑंखें हैं, कुछ ढीले से हैं मेरे हाथ,
इन फर्जी अल्फाजों से अब नै होता है हाल-इ-दिल बयान.
वो दिन भी क्या थे
नवीन
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