Wednesday, September 14, 2011

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हिजाब से झाकती तेरी नज़रें न जाने किस्से धुन्दती हैं,
दस्तख पे नजार लगाये न जाने किस्से धुन्दती हैं
होगा कोई ज़ालिम ही जो इनको रुलाता हैं,
पहले कोई ये तो उसे बताये की यह आँखें उसे धुन्दती हैं 

नवीन 

धुन्दती - search (bloody translation) 

Sunday, September 11, 2011

तिलिस्म

तेरा सुरूर है या कोई तिलिस्म 
जितना सुल्जाहू इससे उतना ही उलझता जाता हूँ मैं 

कुछ तो ख़ास हैं इन आँखों में 
की बिना देखे तेरे चेहरे को फिर भी तेरे अक्स की तरफ खीचा चला जाता हूँ मैं

नवीन 

Wednesday, September 7, 2011

मोल

इन अशरफी का मोल तो बस उस दिन तक था,
जिस दिन तुझे पाया और खुद को खो गया 

"नवीन"