perplexityofmind
These are feelings ideas and other things put into words or atleast tried.
Tuesday, October 25, 2011
Intezar
इंतज़ार
सजा इ इश्क का दर्द कुछ ऐसा हैं की!
इल्तिजा करते रहते है उनके हाँ की !!
नवीन
Saturday, October 15, 2011
वो दिन भी क्या थे
वो दिन भी क्या थे
जब अल्फाजो की जुबां इशारे बोलते थे
आज पन्ने रंग जाते हैं सियहि(इंक) से,
कुछ नम आज ऑंखें हैं, कुछ ढीले से हैं मेरे हाथ,
इन फर्जी अल्फाजों से अब नै होता है हाल-इ-दिल बयान.
वो दिन भी क्या थे
नवीन
Wednesday, September 14, 2011
Search
हिजाब से झाकती तेरी नज़रें न जाने किस्से धुन्दती हैं,
दस्तख पे नजार लगाये न जाने किस्से धुन्दती हैं
होगा कोई ज़ालिम ही जो इनको रुलाता हैं,
पहले कोई ये तो उसे बताये की यह आँखें उसे धुन्दती हैं
नवीन
धुन्दती - search (bloody translation)
Sunday, September 11, 2011
तिलिस्म
तेरा सुरूर है या कोई तिलिस्म
जितना सुल्जाहू इससे उतना ही उलझता जाता हूँ मैं
कुछ तो ख़ास हैं इन आँखों में
की बिना देखे तेरे चेहरे को फिर भी तेरे अक्स की तरफ खीचा चला जाता हूँ मैं
नवीन
Wednesday, September 7, 2011
मोल
इन अशरफी का मोल तो बस उस दिन तक था,
जिस दिन तुझे पाया और खुद को खो गया
"नवीन"
Monday, August 8, 2011
हार
आज फिर कुछ लिखने का मन किया
दवात में भिगोई हुई कलम उठाई
अलफ़ाज़ तो लिखे अरमान न लिख पाए
इस दिल के सामने आज फिर हारा ये दिमाग
आज फिर कुछ लिखने का मन किया
नवीन तिवारी
Friday, July 22, 2011
याद
बिखरते रहते थे तुझे याद करके!
बरसते रहते थे ये अश्क के बादल तुझे याद करके!!
बातें तो मरने की किया करते थे!
आज जी भी नहीं पाते तुझे याद करके!!
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