Monday, August 8, 2011

हार

आज फिर कुछ लिखने का मन किया 
दवात में भिगोई हुई कलम उठाई 
अलफ़ाज़  तो लिखे अरमान न लिख पाए
इस दिल के सामने आज फिर हारा ये दिमाग
आज फिर कुछ लिखने का मन किया 

नवीन तिवारी